बिहार के एक छोटे से गाँव के किसान माला कुमारी एक साधारण कृषक परिवार से आते हैं। घूराहु कोठिया, दरियापुर, सारण के एक छोटे से गाँव के ये किसान पहले पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। गेहूँ और धान की फसल से उतना मुनाफा नहीं मिलता जितना परिवार चलने के उचित होता, इस परिस्थिति में उनको अपने परिवार का साल भर का खर्च नहीं चल पता था। बढ़ती लागत और घटते मुनाफे ने उन्हें नई व्यवसाय के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया और निर्णय लिया को मशरुम उत्पादन के क्षेत्र में काम किया जाय।।
