सुनीता प्रसाद वर्ष 2016 से पहले अपने 0.4 एकड़ भूमि में पारंपरिक खेती, जैसे धान और गेहूं, करती थीं। इस पारंपरिक पद्धति में कई मुख्य समस्याएँ थीं। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इस खेती से पूरे परिवार के छह सदस्यों का खर्च चलाना संभव नहीं था। वर्ष भर में उन्हें केवल 15,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा ही प्राप्त होता था, जो परिवार की बुनियादी जरूरतों, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्चों के लिए पर्याप्त नहीं था। मुख्य चुनौतियाँ भी कई थीं। सीमित भूमि होने के कारण उत्पादन सीमित था। पारंपरिक तकनीकों और उपकरणों के अभाव के कारण बुवाई, कटाई और फसल की देखभाल में अधिक समय और मेहनत लगती थी। सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन पारंपरिक तरीकों पर निर्भर था, जिससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता कम रहती थी। इसके अलावा बाजार तक पहुंच और लाभकारी मूल्य प्राप्त करना भी कठिन था। इन समस्याओं और चुनौतियों को देखते हुए सुनीता प्रसाद ने खड़ी फसल प्रणाली (खड़ी खेती) अपनाने का निर्णय लिया। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से उन्होंने सीमित भूमि में भी अधिक उत्पादन, बेहतर संसाधन उपयोग और आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ाया। खड़ी खेती अपनाने के बाद न केवल उनकी पैदावार बढ़ी, बल्कि परिवार की आय में भी सुधार हुआ और उनकी जीवन शैली में सकारात्मक बदलाव आया।
