बिहार के एक छोटे से गाँव के किसान सत्यनारायण यादव एक साधारण कृषक परिवार से आते हैं। वर्षों से वे पारंपरिक तरीकों से खेती करते आ रहे थे, जहाँ बुवाई में अधिक समय, श्रम और लागत लगती थी। बीज की गहराई और दूरी सही न होने के कारण फसल की पैदावार भी अपेक्षा से कम रहती थी। इन समस्याओं से परेशान होकर सत्यनारायण यादव ने आधुनिक कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी लेना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें रोटरी डिबलर के बारे में पता चला। शुरुआत में उन्हें इस यंत्र को अपनाने में संकोच था, लेकिन कृषि विशेषज्ञों की सलाह और प्रशिक्षण के बाद उन्होंने इसे अपनी खेती में प्रयोग करने का निर्णय लिया। रोटरी डिबलर से बुवाई करने पर बीज समान गहराई और उचित दूरी पर गिरने लगे, जिससे अंकुरण बेहतर हुआ। इस तकनीक के उपयोग से बुवाई का समय आधा हो गया, बीज की बचत हुई और मजदूरी पर होने वाला खर्च भी कम हुआ। परिणामस्वरूप फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। पहले जहाँ उन्हें सीमित लाभ मिलता था, वहीं अब उनकी आय में लगातार बढ़ोतरी होने लगी।


